विश्व गुरु बनना है तो (Viswa Guru Banna Hai To)
विश्व गुरु बनना है तो (Viswa Guru Banna Hai To)
Rate this book:
About This Book
आजादी के 75 वर्षों के बाद आज भी यदि हम अपने देश भारत की तुलना दूसरे विकसित देशों से करते हैं तो कहीं ना कहीं हमें यह अनुभव होता है कि हमें अपनी व्यवस्थाओं को और सशक्त करने तथा उन्हें सुधारने की आवश्यकता है।
किसी भी देश का विकास उस देश की नीति तथा व्यवस्था में निहित है। यदि देश की व्यवस्था लचर होती है तो देश प्रगति के पथ पर उस गति से आगे नहीं बढ़ सकता जिस गति से उसे बढ़ना चाहिए। इस पुस्तक को बनाने का उद्देश्य भारत को विश्व गुरु बनाने से जुड़ा हुआ है। इस पुस्तक में कुछ ऐसे कानून, कानून संशोधन, मांग, सुझाव, विचार, मुद्दों को शामिल किया गया है जो भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ देश बनाने में मदद कर सकते हैं। कृपया इस पुस्तक में दिए सभी बिंदुओं को पढ़ें और यदि आप इनसे सहमत हैं तो इस पुस्तक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं जिससे हम व्यवस्था परिवर्तन हेतु एक मजबूत जनमत संग्रह तैयार कर सकें।
किसी भी देश का विकास उस देश की नीति तथा व्यवस्था में निहित है। यदि देश की व्यवस्था लचर होती है तो देश प्रगति के पथ पर उस गति से आगे नहीं बढ़ सकता जिस गति से उसे बढ़ना चाहिए। इस पुस्तक को बनाने का उद्देश्य भारत को विश्व गुरु बनाने से जुड़ा हुआ है। इस पुस्तक में कुछ ऐसे कानून, कानून संशोधन, मांग, सुझाव, विचार, मुद्दों को शामिल किया गया है जो भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ देश बनाने में मदद कर सकते हैं। कृपया इस पुस्तक में दिए सभी बिंदुओं को पढ़ें और यदि आप इनसे सहमत हैं तो इस पुस्तक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं जिससे हम व्यवस्था परिवर्तन हेतु एक मजबूत जनमत संग्रह तैयार कर सकें।
Buy This Book
As an Amazon Associate and Bookshop.org affiliate, BookOrb earns from qualifying purchases.
Write a Review
Sign in to write a review.