2014 से पहले और बा द का भा रत
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2014 से पहले और बा द का भा रत

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2025

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भूमिभूमिका (Preface)

यह कि ता ब क्यों लि खी गई?
यह कि ता ब कि सी सरका र के समर्थन में नहीं है।
यह कि ता ब कि सी व्यक्ति के वि रो ध में भी नहीं है।
यह कि ता ब उस आम भा रती य के सवा लों का दस्ता वेज़ है,
जो हर चुना व में वो ट देता है,
हर बजट में उम्मी द करता है,
और हर सा ल खुद को थो ड़ा और दबा हुआ महसूस करता है।
सुबह अख़बा र कहता है —

“भा रत वि श्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।”
और शा म को वही ना गरि क पूछता है —
“तो मेरी ज़िं दगी क्यों नहीं सुधरी ?”

यहीं से इस कि ता ब की शुरुआत हो ती है।
यह कि ता ब कि सके लि ए है?

उस मध्यम वर्ग के लि ए, जि सकी बचत घटी है
उस युवा के लि ए, जि सकी डि ग्री है पर नौ करी नहीं
उस कि सा न के लि ए, जि सकी फसल है पर दा म नहीं
उस महि ला के लि ए, जि सका श्रम दि खता नहीं
और उस ना गरि क के लि ए, जो सवा ल पूछना देशद्रो ह नहीं मा नता
यह कि ता ब कि सके ख़ि ला फ़ नहीं है?
कि सी पा र्टी के नहीं
कि सी नेता के नहीं
कि सी वि चा रधा रा के नहीं
यह कि ता ब सि र्फ़ जवा बदेही के पक्ष में है

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